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  मैं अभारी हूँ !!!


मैं अभारी हूँ आपकी 
मैं आभारी हूँ आपकी “गुरु”…
गुरु आपने बुझते हुए चमन,
पर आपने बनादिया मुश्कें खुटन।
आप ने खान -खान पिघलकर हम्मे
उजाला दिया है ,”गुरु”
मैं अभारी हूँ आपकी
आपके महानता में,
कबीर कहते हैं-
पहले वो गुरु के चरण स्पर्श करेंगे।
अली कहते हैं-
मैं ग़ुलाम बन जाऊंगा उसका ,जिसने मुझे एक लफ्ज़ सिखा दिया।
मैं अभारी हूँ आपकी ,”गुरु”
आपने खुद को पिघला कर,
हम को रोशनी दी है।
मैं अभारी हूँ आपकी “गुरू”
आप ने आत्मसमन मुझ में खिला दिया,
मुझे “मैं” हो ने का गर्व दिया 
मुझे में गुण आपने बोया
आप ने तिरस्कारो को उपकार में बदल दिया
अच्छा इंसान बनने की मनोकमना दी,
आप ने अन्य विचारो का महत्वपूर्ण बताया।
मैं अभारी हूँ आपकी “गुरु”
आप ने अपना ज्ञान हमको बाहें फेलाकर 
निछावर करदिया।
टूटे हुए तारे को चमकना सिखा दिया
मुरझाते हुए कोमल को खिला दिया
गिरने के बाद उतना सिखा दिया
सपनो को सच्चा बनाना सिखा दिया।
मैं अभारी हूँ आपकी “गुरु”
कैसे मैं चुकाऊँ आपका अभार???
करू मैं चरण स्पर्श बार बार और 
ग़ुलाम बनूं दिल -ओ-जान से, आपकी “गुरु”।
कैसे मैं चुकाऊँ आपका अभार???

 

शिफ़ा अंजुम

 shifaanjum2309@gmail.com 

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