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ग्रह ज्योतिष

ग्रह एवं उनसे सम्बन्धित रोग और उपाय

 

हर बीमारी का समबन्ध किसी न किसी ग्रह से है जो आपकी कुंडली में या तो कमजोर है या फिर दुसरे ग्रहों से बुरी तरह प्रभावित है . यहाँ सभी बीमारियों का जिक्र नहीं करूंगा केवल सामान्य रोग जो आजकल बहुत से लोगों को हैं उन्ही का जिक्र संक्षेप में करने की कोशिश करता हूँ . यदि स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है तो आज धनवान कोई नहीं है . हर व्यक्ति की कोई न कोई कमजोरी होती है जहाँ आकर व्यक्ति बीमार हो जाता है . हर व्यक्ति के शरीर की संरचना अलग होती है . किसे कब क्या कष्ट होगा यह तो डाक्टर भी नहीं बता सकता परन्तु ज्योतिष इसकी पूर्वसूचना दे देता है कि आप किस रोग से पीड़ित होंगे या क्या व्याधि आपको शीघ्र प्रभावित करेगी .

सूर्य से रोग

सूर्य ग्रहों का राजा है इसलिए यदि सूर्य आपका बलवान है तो बीमारियाँ कुछ भी हों आप कभी परवाह नहीं करेंगे . क्योंकि आपकी आत्मा बलवान होगी . आप शरीर की मामूली व्याधियों की परवाह नहीं करेंगे . परन्तु सूर्य अच्छा नहीं है तो सबसे पहले आपके बाल झड़ेंगे . सर में दर्द अक्सर होगा और आपको पेन किलर का सहारा लेना ही पड़ेगा .

चन्द्र से प्रभावित रोग

चन्द्र संवेदनशील लोगों का अधिष्ठाता ग्रह है . यदि चन्द्र दुर्बल हुआ तो मन कमजोर होगा और आप भावुक अधिक होंगे . कठोरता से आप तुरंत प्रभावित हो जायेंगे और सहनशक्ति कम होगी . इसके बाद सर्दी जुकाम और खांसी कफ जैसी व्याधियों से शीग्र प्रभावित हो जायेंगे . सलाह है कि संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में न आयें क्योंकि आपको भी संक्रमित होते देर नहीं लगेगी . चन्द्र अधिक कमजोर होने से नजला से पीड़ित होंगे . चन्द्र की वजह से नर्वस सिस्टम भी प्रभावित होता है .

मंगल से रोग

मंगल रक्त का प्रतिनिधित्व करता है परन्तु जिनका मंगल कमजोर होता है रक्त की बीमारियों के अतिरिक्त जोश की .कमी होगी . ऐसे व्यक्ति हर काम को धीरे धीरे करेंगे . आपने देखा होगा कुछ लोग हमेशा सुस्त दिखाई देते हैं और हर काम को भी उस ऊर्जा से नहीं कर पाते . अधिक खराब मंगल से चोट चपेट और एक्सीडेंट आदि का खतरा रहता है .

बुध से दमा और अन्य रोग

बुध व्यक्ति को चालाक और धूर्त बनाता है . आज यदि आप चालाक नहीं हैं तो दुसरे लोग आपका हर दिन फायदा उठाएंगे . भोले भाले लोगों का बुध अवश्य कमजोर होता है . अधिक खराब बुध से व्यक्ति को चमड़ी के रोग अधिक होते हैं . साँस की बीमारियाँ बुध के दूषित होने से होती हैं . बेहद खराब बुध से व्यक्ति के फेफड़े खराब होने का भय रहता है . व्यक्ति हकलाता है तो भी बुध के कारण और गूंगा बहरापन भी बुध के कारण ही होता है .

मोटापा और ब्रहस्पति

गुरु यानी ब्रहस्पति व्यक्ति को बुद्धिमान बनता है परन्तु पढ़े लिखे लोग यदि मूर्खों जैसा व्यवहार करें तो समझ लीजिये कि व्यक्ति का गुरु कुंडली में खराब है . गुरु सोचने समझने की शक्ति को प्रभावित करता है और व्यक्ति जडमति हो जाता है . इसके अतिरिक्त गुरु कमजोर होने से पीलिया या पेट के अन्य रोग होते हैं . गुरु यदि दुष्ट ग्रहों से प्रभावित होकर लग्न को प्रभावित करता है तो मोटापा देता है . अधिकतर लोग जो शरीर से काफी मोटे होते हैं उनकी कुंडली में गुरु की स्थिति कुछ ऐसी ही होती है .

शुक्र और शुगर

शुक्र मनोरंजन का कारक ग्रह है . शुक्र स्त्री, यौन सुख, वीर्य और हर प्रकार के सुख और सुन्दरता का कारक ग्रह है . यदि शुक्र की स्थिति अशुभ हो तो जातक के जीवन से मनोरंजन को समाप्त कर देता है . नपुंसकता या सेक्स के प्रति अरुचि का कारण अधिकतर शुक्र ही होता है . मंगल की दृष्टि या प्रभाव निर्बल शुक्र पर हो तो जातक को ब्लड शुगर हो जाती है . इसके अतिरिक्त शुक्र के अशुभ होने से व्यक्ति के शरीर को बेडोल बना देता है . बहुत अधिक पतला शरीर या ठिगना कद शुक्र की अशुभ स्थिति के कारण होता है .

लम्बे रोग और शनि

शनि दर्द या दुःख का प्रतिनिधित्व करता है . जितने प्रकार की शारीरिक व्याधियां हैं उनके परिणामस्वरूप व्यक्ति को जो दुःख और कष्ट प्राप्त होता है उसका कारण शनि होता है . शनि का प्रभाव दुसरे ग्रहों पर हो तो शनि उसी ग्रह से सम्बन्धित रोग देता है . शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक कुछ भी कर ले सर दर्द कभी पीछा नहीं छोड़ता . चन्द्र पर हो तो जातक को नजला होता है . मंगल पर हो तो रक्त में न्यूनता या ब्लड प्रेशर, बुध पर हो तो नपुंसकता, गुरु पर हो तो मोटापा, शुक्र पर हो तो वीर्य के रोग या प्रजनन क्षमता को कमजोर करता है और राहू पर शनि के प्रभाव से जातक को उच्च और निम्न रक्तचाप दोनों से पीड़ित रखता है . केतु पर शनि के प्रभाव से जातक को गम्भीर रोग होते हैं परन्तु कभी रोग का पता नहीं चलता और एक उम्र निकल जाती है पर बीमारियों से जातक जूझता रहता है . दवाई असर नहीं करती और अधिक विकट स्थिति में लाइलाज रोग शनि ही देता है .

ब्लड प्रेशर और राहू

राहू एक रहस्यमय ग्रह है . इसलिए राहू से जातक को जो रोग होंगे वह भी रहस्यमय ही होते हैं . एक के बाद दूसरी तकलीफ राहू से ही होती है . राहू अशुभ हो तो जातक की दवाई चलती रहती है और डाक्टर के पास आना जाना लगा रहता है . किसी दवाई से रिएक्शन या एलर्जी राहू से ही होती है . यदि डाक्टर पूरी उम्र के लिए दवाई निर्धारित कर दे तो वह राहू के अशुभ प्रभाव से ही होती है . वहम यदि एक बीमारी है तो यह राहू देता है . डर के मारे हार्ट अटैक राहू से ही होता है . अचानक हृदय गति रुक जाना या स्ट्रोक राहू से ही होता है .

प्रेत बाधा और केतु

केतु का संसार अलग है . यह जीवन और मृत्यु से परे है . जातक को यदि केतु से कुछ होना है तो उसका पता देर से चलता है यानी केतु से होने वाली बीमारी का पता चलना मुश्किल हो जाता है . केतु थोडा सा खराब हो तो फोड़े फुंसियाँ देता है और यदि थोडा और खराब हो तो घाव जो देर तक न भरे वह केतु की वजह से ही होता है . केतु मनोविज्ञान से सम्बन्ध रखता है . ओपरी कसर या भूत प्रेत बाधा केतु के कारण ही होती है . असफल इलाज के बाद दुबारा इलाज केतु के कारण होता है

साभार

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