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व्यंग्य

इस युग की कहानी – मार्डन सावित्री 

सत्यवान सावित्री की कहानी तो प्राय: सबने सुनी होगी | क्या आज के युग में कोई सावित्री होगी ? यदि होगी तो कैसी होगी ?

तो हमारी जो मार्डन सावित्री है,वो कैसी है ? प्राचीन सावित्री खूबसूरत थी और हमारी आज की सावित्री ख़ूबसूरती से लैस है,जैसे कोई हथियारों से लैस होता है | यानी जिम में तराशा हुआ बदन ,ब्यूटी पार्लर में नुची भवें ,कोस्मेटिक सर्जन द्वारा तराशी नाक और सुघड काया |

प्राचीन सावित्री अलंकृत थी,अपने शील से अपने गुणों से,आज की सावित्री अलंकृत है मेकअप प्रसाधनों से काजल से सजे कजरारे नैन,लिपस्टिक से लाल अधरावली,पाउडर से दमकता मुखमंडल | और वस्त्रों की तो क्या कहें ‘तनु काया,लघु वस्त्र की कहावत को चरित्रार्थ होती है |

हमारी प्राचीन सावित्री को उसके पिता ने आज्ञा दी थी पति की तलाश की ,लेकिन हमारी आज की सावित्री को पिता की  आज्ञा से कोई सरोकार नहीं ,उसे तो पति भी नहीं चाहिये क्योंकि वो रहना पसंद करती है ‘लिव इन रिलेशन’

ये लिव इन रिलेशन भी हमारे देश के संस्कारों पर करारा तमाचा है ,लेकिन आजकल के युवा के स्वर में कहें तो “मजेदार है |”  कोई बंधन नहीं ,कोई जिम्मेदारी नहीं ,जब तक मन करे रहो वरना “जय रामजी की |”

इस व्यवस्था में एक फायदा तो है कम से कम विवाहेतर सम्बन्ध तो नहीं बनेंगे |

हाँ तो बात कर रहे थे मोर्डन सावित्री की ,ये मोर्डन सावित्री कॉल सेंटर में नौकरी करती है | इसका सत्यवान भी वही काम करता है | सत्यवान की रात की पारी है और सावित्री की दिन की यानि दोनों की दूरियां | हफ्ते में एक दिन सत्यवान और सावित्री मिलते हैं ,और अपना प्यार ,मोहब्बत ,लड़ाई झगडा सभी एक साथ निपटा लेते है |

एक दिन ऐसी ही छुट्टी की अलसाई सी सुबह थी |सावित्री की आंख खुली ,रात का नशा अभी पूरी तरह से उतरा नहीं था | सत्यवान अभी भी सो रहा था तभी सावित्री ने देखा कि एक अनजान पुरुष काले वस्त्र धारण किये हुए उनके कमरे में खड़ा है | सावित्री ने हडबडाकर अपने वस्त्र ठीक किये और बोंली “कौन हो तुम हेंडसम “?

में यमराज हूँ,… यमराज ने …..हडबडाकर जबाब दिया और तुम्हारे पति का वक्त पूरा हुआ उसे लेने आया हूँ , वो बोले | “ये मेरा पति नहीं है”……..सावित्री तमतमाकर बोंली और अपने आप को दर्पण में संवारने लगी |

बेचारे यमराज जी की कुछ समझ में नहीं आया ,साथ राह रहे है साथ सो रहे हैं और पति नहीं है ? “खैर मुझे क्या, मुझे  तो अपना काम करना है” …यमराज ने  सोचा और सत्यवान की आत्मा को लेकर चल पड़े | तभी सावित्री ने पुकारा ….. रुको …..| अब यमराज जी चौंके और उन्होंने सोचा लगता है इसका भी पतिव्रत जाग गया |

सावित्री की तरफ मुड़कर बोले….. “ मुझे पता है तुम सत्यवान का जीवन वापिस चाहती हो |”

सावित्री बोंली , “मुझे उसकी कोई जरुरत नहीं |“

यमराज जी ने सोचा ……….लगता है अब ये भी प्राचीन सावित्री की तरह बुद्धिमानी का प्रदर्शन करेगी ,बोले ,……अब तुम कहोगी मुझे सन्तान चाहिये ,और बिना सत्यवान के सन्तान कैसे होगी ?

इस पर सावित्री बोंली , “संतान के लिए मुझे सत्यवान की आवश्यकता नहीं वो तो में “ कृत्रिम गर्भाधान”  के जरिये भी प्राप्त कर लूंगी | इससे तो वैसे भी में ऊब चुकी थी |

अब यमराज जी सर खुजाते हुए बोले , “ देवी फिर तुमने मुझे क्यों रोका ? तुम्हें क्या चाहिए ?

सावित्री बोली ,”तुम्हारा मोबाईल नंबर ……..तुम बहुत  हेंडसम हो………और में ….आजाद |

                         अर्चना चतुर्वेदी

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