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यात्रा संस्मरण

यात्रा संस्मरण

शैक्षिक यात्रा संस्मरण 2018

लोकसभा संसद भवन की यात्रा

निहाल छीपा

 

पं.कुंजीलाल दुबे जी की स्मृति में प्रतिवर्ष युवा संसद मंचन का नाटकीय ढंग से मंचन की प्रस्तुति की जाती है.

02  फरवरी 2017 का वह दिन था. जब महाराणा प्रताप शास्कीय स्नाकोत्तर महाविद्यालय गाड़रवारा के प्राचार्य एम.के.साहू जी ने तथा प्रोफेसर डॉ. जवाहरलाल शुक्ल जी के मार्गदर्शन से हम सभी छात्र छात्राओं को संसद भवन में होने वाली कार्यवाही से अवगत कराया गया. और लगभग 30 छात्र छात्राओ की एक टीम बनाई गई.  जिसमें संसद मे स्पीकर अध्यक्ष महोदय , मार्शल वनाना था और पक्ष में राजपाल ,लेखापाल, मुख्यमंत्री, पर्यावरणमंत्री ,गृहमंत्री,जनकल्याणमंत्री, महिला एवं बालविकास मंत्री ,स्वास्थ्य मंत्री और समस्त पक्ष की एक पक्षीय टीम बनाई गई. और विपक्ष टीम में नेता प्रतिपक्ष और समस्त सदस्य विपक्ष की विपक्षीय टीम बनाई गयी.

 युवा संसद मंचन की रिहर्सल के लिए हमे कार्यक्रम मे मंचन की प्रस्तुति से जुडे अहम तथा महत्वपूर्ण तथ्य की जानकारी के लिए एक प्रपत्र दिया गया जिसमें संसद मे होने वाली कार्यवाही का प्रारंभ से अंत तक पूरी जानकारी थी. और शुक्ल सर के मार्गदर्शन में हमने रिहर्सल शुरू कर दी.

इस रिहर्सल मे सर्वप्रथम् सूत्रधार के लिए आकृति कौरव और संसद के स्पीकर अध्यक्ष का पद अजीत लोधी को दिया गया. इस प्रकार मार्शल अभिलाषा गौंड मुख्यमंत्री आरती गुर्जर राजपाल आरती पवार गृहमंत्री जागृति सिंह राजपूत लेखापाल के लिए रितु मेहरा प्रतिभा कौरव प्रज्ञा नागवंशी पर्यावरण मंत्री सुषमा विश्नकर्मा जनकल्याणमंत्री अरूणा कौरव महिला एवं बाल विकास मंत्री अलीशा कुरैशी रक्षामंत्री गोपी साहू स्वास्थ्यमंत्री आकाश द्विवेदी और छाया कोरी , गीता धानक ,राधा पटेल,मोहनी कहार , उमेश कुशवाहा  को सदस्य पक्ष का पद दिया गया और विपक्ष में नेता प्रतिपक्ष नीलेश जाटव  और #निहाल छीपा,अरविंद केवट ,किरण जाटव,  नेहा छीपा , शिखा रजक, श्वेता श्रीवास ,अर्चना ठाकुर ,खुश्बू रजक,लक्ष्मी अहिरवार, प्रियंका शर्मा को सदस्य विपक्ष का पद दिया गया.

युवा संसद मंचन की रिहर्सल के एक सप्ताह पश्चात 16 फरवरी 2017 को प्राचार्य महोदय जी के निर्देश में हम सभी छात्र छात्राओ को हमारे स्थानीय माननीय विधायक श्री गोविंद पटैल जी द्वारा विधानसभा में संसदीय कार्यप्रणाली से रूबरू कराया और हमने भी  अपनी बात रखी. जिस पर माननीय विधायक जी ने विधानसभा में विरोध के प्रदर्शन  मे डेक्स को जोर जोर से थपथपाने का नियम था और इसके अलावा शून्यकाल, अप्रस्ताव , और भी अनेक गतिविधियो से अवगत कराया विधायक जी के मार्गदर्शन से हम सभी को रिहर्सल के लिए प्ररेणा मिली और हमने बहुत मेहनत कर नाटक के डॉयलाग बनाये. जिससे दर्शक तथा मुख्य अध्यक्ष का ध्यान हमारी ओर ही रहे. हम सभी ने शौचालय,बाढ़,और पर्यावरण से संबंधित प्रश्न तैयार किए जिससे मंचन में भी उत्साहवर्धक हो गया. एक महीने की रिहर्सल के बाद संसद मंचन का वह दिन आ गया. शुक्ल सर जी के द्वागया आडोटोरियम हॉल मे माइक स्टेज और टेंट की व्यवस्था की. इस मंचन को देखने के लिए मुख्य अतिथि माननीय विधायक महोदय जी और सांसद प्रतिनिधि श्री सुरेंद्र गुर्जर प्राचार्य महोदय जी एवं समस्त जनभागादारी सदस्यो के समक्ष युवा संसद मंचन की प्रस्तुति की गयी.इस प्रस्तुति के बाद विधायक महोदय जी ने कुछ गलतियाँ बताई जो अंजाने में की गयी थी. इस कारण हमारा राज्य स्तर पर होने वाले मंचन के लिए मिलने वाले अंक कम थे. विधायक महोदय जी ने हमारे डायलाग और मंचन की भूरी भूरी प्रसंशा की. और हमारी टीम को 3000 रू. की स्टेशनरी प्रदान करने की घोषणा की और आगामी माह में विधानसभा भोपाल के भ्रमण पर ले जाने का आश्वासन दिया.यह भ्रमण माननीय मुख्यमंत्री जी के दौरे के कारण रद्द कर दिया गया जिससे छात्र-छात्राऐ निराश थे विधानसभा भ्रमण एक स्वप्न रह गया.

युवा संसद मंचन कार्यक्रम के बाद विधानसभा भोपाल भ्रमण के रद्द होने के कारण छात्र छात्राऐ निराश थे लेकिन यह निराशा ज्यादा दिन नहीं रही.

युवा संसद मंचन के एक वर्ष पश्चात सांसद प्रतिनिधि एड. सुरेन्द्र गुर्जर जी एक वर्ष पूर्व हुए विधानसभा भ्रमण रद्द होने की जानकारी से अवगत थे . उन्होने होशंगाबाद क्षेत्र के सांसद माननीय श्री राव उदय प्रताप जी से अनुग्रह वार्ता की इस वार्ता में सुरेंद्र गुर्जर जी ने कॉलेज के छात्र छात्राओं के युवा संसद मंचन कार्यक्रम के बारे में बताया और विधानसभा भ्रमण के रद्द होने के बारे में भी बतलाया और कहा कि छात्र छात्राओ के लिए यदि लोकसभा संसद भ्रमण ले जाये तो उन्हे संसदीय कार्यप्रणाली देख सकेंगे. यदि सर आप अनुमति दे सुरेंद्र गुर्जर जी की बात सुन माननीय सांसद जी ने कहा यह बहुत अच्छी बात है हमारे क्षेत्र के बच्चे लोकसभा की कार्यप्रणाली देखना चाहते है इससे अच्छी बात क्या हो सकती है.

प्राचार्य महोदय जी ने सूचना प्रपत्र भेज छात्र छात्राओं को बताया कि आप सभी छात्र छात्राऐ जो लोकसभा नई दिल्ली जाना चाहते है वे अपने अभिभावकों से सहमतिपत्र पर हस्ताक्षर करवा कर यात्रा प्रभारी प्रो. श्री आर.के.कौरव जी के पास जमा करे. छात्र छात्राओं की सीमित संख्या रखने के लिए 500 रू. यात्रा शुल्क भी देय रहा.

प्राचार्य महोदय जी ने सभी छात्र छात्राओं को सूचित किया कि सभी छात्र छात्राऐ 26 मार्च 2018 की शाम हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस से जाना है

हम सभी प्राचार्य महोदय जी के साथ शाम  7 बजे नई दिल्ली के लिए 32 लोगो का जत्था दिल्ली के लिए रवाना हुआ.

 हम सभी अपनी बर्थ पर जाकर बैठ गए छात्रो का अलग ग्रुप और छात्राओं का अलग ग्रुप बनाया गया और और बैठक व्यवस्था इस तरह बनायी गयी की सभी छात्र छात्राओं की निगरानी हो सके.

रेल के प्रारम्भिक डिब्बे मे नीतीश शर्मा अशोक कौरव दीपक तिनगुरिया मध्य में दो डिब्बे थे पहले डिब्बे में छात्राऐ और सुनीता गुप्ता मेम थी और दूसरे डिब्बे मे छात्र थे और अंत के डिब्बे मे प्राचार्य महोदय आर के कौरव सर सुरेंद्र सर और शुक्ला सर बैठे हुए थे हमारे हिन्दी विभाग की प्राध्यापिका सुनीता गुप्ता छात्राओ की देखरेख में थी सभी शिक्षकों ने सभी विद्यार्थियों की प्रत्येक घन्टे निगरानी की ताकि किसी को कोई समस्या या व्यवधान उत्पन्न ना हो.

दिल्ली के सफर के समय सभी छात्रो ने बहुत मस्ती की. हमारे सहपाठी मित्र और ओजस्वी वक्ता अरविन्द केवट ने कवियत्री मुमताज नसीम की कुछ पंक्तिया ” घर से निकली थी मैं मैने सोचा ना था कि रास्ते मे मुलाकात हो जायेगी ” सुनाई इन पंक्तियो से इक शानदार महफिल बन गयी अजीत आकाश नीलेश गोपी ने भी कुछ गाने सुनाए और मस्ती की अजीत के आग्रह पर मैने भी एक दो स्वरचित कविताऐ सुनायी  जिससे महफिल में मजा आने लगा. सभी छात्र बडे ही आनन्दित हुए हमारा शोर सुनकर प्राचार्य महोदय जी निरीक्षण के लिए आ गये. सरजी कहने लगे कि क्या चल रहा है अजीत ने कहा कि सर निहाल और अरविन्द  कविता सुना रहे है इतना कहकर सभी छात्रो ने प्राचार्य महोदय सर जी से एक दो शेरो शायरी सुनाने को कहा. हम सभी के कहने पर सरजी ने एक शेर सुनाया. शेर सुनाने के बाद सरजी कहने लगे की यदि स्वरचित रचनाऐ सुनाओगे तो ही रूकूँगा नहीं तो हम चले जाएँगे अजीत ने सर से कहा कि निहाल स्वरचित रचना लिखता है सरजी के कहने पर तथा उनकी अनुमति लेकर मैने डायरी निकाली और माँ नर्मदा पर विशेषीकृत रचना ” मात नर्मदे तुम कल्याणी कृपा कीजिए हे! मगरवाहिनी ” से लेकर प्रकृति वर्षा मोहब्बत संस्कृति सभी रचनाऐ सुनायी समय अधिक हो गया था लगभग रात के 10 बजने में थे सरजी ने कहा कि आप सभी भोजन कर ले इतना कहकर सरजी अपनी बर्थ की ओर चल दिये. हम सभी घर से भोजन लाए थे हम सभी ने मिल बाँट कर भोजन कर लिया.

भोजन के बाद हम फिर से मस्ती करने लगे. ज्यादा मस्ती और शोर से पीछे बर्थ से एक सज्जन ने कहा की आप ज्यादा शोर ना करे हमारे साथ मरीज अम्मा है जिनकी नींद मे व्यवधान हो रहा है सभी छात्रों की ओर से हमारे सीनियर अजीत लोधी ने क्षमा माँगते हुए आश्वाशन दिया की हम सभी अब शोर नहीं करेंगे.

इतना कहकर सभी छात्र अपनी बर्थ पर जाकर सो गए. सुबह 4 बजे हम सभी छात्र उठ गये और दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर आपसी चर्चाऐ करने लगे. इसी बीच रेलगाडी कुछ समय के लिए रूकी यह चम्बल क्षेत्र था जहाँ की अद्भुत चम्बल घाटियाँ और चम्बल नदी देखी जिसके हम सभी ने मनोरम छायाचित्र निकाले. गाडी आगे बढी हम ने देखा कि उस स्थान पर अनेक मोर बतख काली बतख दलदलीय इलाके मे आम और शीशम के अनेक बडें बडे वृक्ष थे हमारे प्राणीशास्त्र के प्राध्यापक आर के कौरव सरजी ने बताया की आगे इसी प्रकार की जैव विविधता दिखायी देंगी.

चाय नाश्ता करने के बाद हमारा निरीक्षण करने के लिए माननीय सांसद प्रतिनिधि श्री एडवोकेट  सुरेन्द्र गुर्जर जी आये उन्होने सब छात्रो से पूछा कि “कल कौन कविता कह रहा था ” हमारे सहपाठी मित्र गोपी ने कहा कि “सर कल रात में निहाल और अरविन्द थे ” तब सुरेन्द्र सर ने कहा कि ” निहाल कुछ कविता सुनाओ ” उनके कहने पर मैने एक संकलित पंक्तिया सुनायी ” शब्दो को अधरों पर धरकर मन के भेद ना खोलो हम नयनो को पढ़ लेते है तुम नयनो से बोलो ” इतना ही सुनाया कि सुरेन्द्र सर नीलेश  और आकाश से बात करने लगे तब मैने कविता सुनाना बन्द कर दिया. सुरेन्द्र सर पुनः बोले कि कविता सुनाओ मुझे लगा कि सर ने पहली पंक्तिया नहीं सुन पाए है अतः मैने वही पंक्तिया फिर सुनायी. इस बार सर अजीत से बात करने लगे. मैने सोचा सर का मन नहीं है सुनने का मैंने फिर कविता पाठ बंद कर दिया. तीसरी बार अजीत ने कहा सर आप निहाल की कविता सुन लीजिए सुरेन्द्र सर फिर बोले निहाल सुनाओ मैने सोचा सर को सुनने का  मन नहीं है मैने पिछली पंक्तिया पुनः दोहराई सुरेन्द्र सर कहने लगे ” क्या निहाल कब से वही एक ही पंक्तिया सुना रहे हो अब हमें कोई कविता वविता नही सुनना ” इस बात पर सभी हँस पडे. सुरेन्द्र सर ने सबका परिचय पूछा और वे कुछ देर बैठे और छात्राओं के निरीक्षण के लिए चले गये. कुछ देर बाद सुनीता गुप्ता मेम जी निरीक्षण के लिए आयी और उन्होने सभी को मिठाईयाँ खाने को दी  और कहा कि कल तुम लोगो ने बहुत शोर किया ज्यादा मस्ती मत किया करो इतना कहकर वे आगे अपनी बर्थ की ओर चली गयी.

इसी बीच शुक्ला सर जी आ गए और उन्होने ने एक महान दार्शनिक प्लूटो के द्वारा रचित पॉलिटिक्स नामक किताब के बारे बताया सर जी ने बताया कि प्लूटो ने अपनी पुस्तक में कवियों के बारे में लिखा है उसने कवि को पागल कहा है और इससे दूर रहना चाहिए क्योकि कवि कल्पना मे जीता यदि कवि राजनीतिज्ञ हो उसे बख्सना नहीं चाहिए शुक्ला सर जी ने कुछ व्यंग्य की बाते कर सभी को बहुत हँसाया.

शुक्ला सर जी कहने लगे ” बच्चो मथुरा के आगे सारा जल दूषित है जिस हम पी नही सकते आप सब अपने पास पर्याप्त मात्रा में पानी रखें. और सभी भोजन कर ले. हम सभी 2  बजे तक दिल्ली पहुँच जाएँगे. हम सभी ने भोजन किया गाडी आगरा स्टेशन पर रूकी कुछ छात्रों ने गिफ्ट खरीदे. गाडी आगे बढ़ी लगभग दो घण्टे बाद हम हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस से दिल्ली पहुँच गये.

स्टेशन पर सभी छात्र छात्राओं की गिनती हुई और कुछ यात्रा के यादगार पल मोबाइल में छायाचित्र खींचे गये. दिल्ली पहुँच ने के बाद हम सभी को सांसद महोदय जी के बंगले पर जाना था इसके लिए प्राचार्य महोदय जी ने कुछ टैक्सी की और हम सभी राजेन्द्र मार्ग 24 पर स्थित बंगले पर पहुँच गये.

जहाँ हमारी मुलाकात हमारे क्षेत्र के सांसद श्री उदयराव प्रताप जी से हुई  उन्होने सभी शिक्षकों से कुशलक्षेम पूछी और सभी छात्र छात्राओं से परिचय पूछा. सांसद जी ने सभी को चाय नाश्ता कराया.

सुनीता मेम जी और छात्राओं को बंगले मे रहने की व्यवस्था कि. और छात्रों और सभी शिक्षकगणों को पास स्थित आर्या टूरिज्म होटल में रहने की व्यवस्था कि.सभी छात्र और शिक्षक होटल के लिए चले गये जहाँ कुछ देर आराम करने के पश्चात स्नान किया और तैयार हो गये शाम के ५ बजे थे कुछ छात्र प्राचार्य महोदय जी के साथ इण्डिया गेट के लिए निकल गये और कुछ छात्र टैक्सी से सांसद महोदय जी के बंगले में मैम और छात्राओं को लेने चल दिए.

हमारे इंडिया गेट पहुँचते ही सभी ने मोबाइल से मनमोहक दृश्यों कैद किया शाम का समय था और अच्छी भीड़ भी थी प्राचार्य महोदय जी ने सभी के लिए आइसक्रीम का आर्डर दिया. और सभी ने आइसक्रीम के स्वाद आनन्द लिया. हमने वहाँ एक विदेशी सैलानी को देखा जो इंडिया गेट को देखकर कागज पर पेंसिल से उसका हू बहू चित्र अभिचित्रित कर रहा था. इतने में शुक्ला सर जी सभी छात्र छात्राओं मेम शिक्षकगणो को ले कर इंडिया गेट आ पहुँचे जहाँ सभी ने सामूहिक छायांकन कराया.

धीरे धीरे सूर्य ढल रहा था और रात में चाँद चाँदनी सा चमक रहा था जिससे इंडिया गेट की शोभा अद्वितीय थी. इंडिया गेट घूमने के बाद दिल्ली में स्थित कैनॉट पैलेश चले गये. जहाँ पर आर. के. कौरव सर जी ने सभी के लिए आइसक्रीम का आर्डर दिया और सभी ने आइसक्रीम का आनन्द लिया.

रात्रि के आठ बज रहे थे सुरेन्द्र सर ने बताया कि ” सर सांसद जी ने आप सभी के भोजन की व्यवस्था आंध्रप्रदेश भवन में स्थित सांई कैन्टीन में की गई है ” प्राचार्य महोदय जी एवं सुरेन्द्र सर सभी को आन्ध्रप्रदेश भवन की कैन्टीन में ले गए. कुछ समय बैठने के बाद सभी को नाना प्रकार के व्यंजन परोसे गये.

भोजन करने के पश्चात सभी छात्राऐ मेम सांसद जी के बंगले पर और छात्र और शिक्षकगण आर्या होटल के लिए चले गए.रात्रि के 10 बजे थे होटल पहुँचने के बाद प्राचार्य महोदय जी ने सभी से पूछा कि ” आप सभी सोएँगे या हमारे साथ घूमने और लस्सी पीने चलोगे.

सर की बात सुनकर कुछ छात्र सोने चले गए और कुछ छात्र सर जी के साथ घूमने चले गये. प्राचार्य महोदय जी ने सभी को अपनी- अपनी पसंद के अनुसार लस्सी रबडी रसगुल्ले खिलाये.और आस पास का बाजार घूमते हुए रात अधिक हो गयी थी हम सभी छात्रों ने प्राचार्य महोदय जी से अनुमति ली और आर्या होटल में सोने के लिए चले गये. क्योकि अगले दिन हम सभी को संसद भवन भ्रमण के लिए जो जाना था सफर और घूमने के कारण सभी थककर सो गए.

सुबह 6 बजे हम सभी उठ गये दैनिक नित्यकर्म स्नानादि से निवृत हो गए संसद भवन जाने के पूर्व हम सभी ने एक ड्रेस कोड तय किया ताकि हमारे कॉलेज का अनुशासन और पहचान अभिव्यक्त हो सके.

हम सभी सांसद महोदय जी के बंगले पर गए जहाँ सभी ने स्वल्पाहार किया और सांसद जी ने प्राचार्य महोदय और सभी छात्र छात्राऐ शिक्षकगण मेमजी सभी को द्वार प्रवेश पत्रक दिए ताकि हमें उस पत्रक से संसद के भीतर प्रवेश मिल सके. सांसद जी के सहायककर्ता  सुशील  सिंह जी  ने सभी को इस बात से अवगत कराया की आप लोग संसद भवन के अंदर रूपया पहचान पत्र और द्वार प्रवेश पत्र ले जा सकते है इसके अलावा घडी पाउच मोबाइल सिक्का कुछ भी नहीं ले जा सकते यदि आप कोई संदिग्ध वस्तु ले जाते है तो आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकती है अतः हम सभी ने अपने काम की वस्तुऐ बैग मे रखी और महत्वपूर्ण पत्र अपने पास रखे.

सांसद महोदय जी को समय पर संसद भवन पहुँचना था इसलिए सांसद महोदय जी पहले ही संसद भवन के लिए निकल गये और प्राचार्य महोदय जी सभी को लेकर संसद भवन आ गये. संसद भवन के बाहर रोड पर पुलिस द्वारा कड़ी निगरानी थी एक पुलिस वाले ने हमें रोका तभी प्राचार्य महोदय जी ने द्वार प्रवेश पत्र दिखाया और सभी के पत्र देखकर सभी को अंदर जाने दिया. सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त थी की परिंदा भी पर ना मार सके. संसद भवन के अंदर पहुँचते समय हम सभी की कम से कम आठ बार तलाशी ली गयी. पुलिसकर्मियो ने अपनी ड्यूटी ईमानदारी से की

तलाशी के अंत में एक जगह और कडी जाँच हुई जहाँ पर सभी ने अपने परिचय पत्र और द्वार प्रवेश पत्र वहाँ के लोगो को दिए जानकारी मिलाने के बाद सभी को वापस कर दिए अंतिम चैकिंग के दौरान हमारे अशोक सरजी की छोटी सी पॉकेट कंघी भी जब्त कर ली. संसद भवन के अंदर एक महिला कर्मचारी ने सभी को व्यवस्थित रूप से कुर्सी पर बैठाया और बात ना कर ने की हिदायत दी.

हम सभी संसद की कार्यवाही देखने लगे दोपहर के 12 बजे थे संसद में लोकसभा स्पीकर अध्यक्ष महोदया श्रीमति सुमित्रा महाजन का आगमन हुआ सभी ने खडे होकर अभिवादन किया. कुछ सांसद और मंत्री आपस में कुछ चर्चाऐ कर रहे थे. तभी बाहर से कुछ विपक्षी दल के नेता और सांसद बाहर से अन्दर की और नारद मुनि के रूप में आकर जुमले बाजी कर रहे थे अपने जुमले में जस्टिस आन्ध्रा जस्टिस आन्ध्रा कह रहे थे और अपनी भाषा में बात कर रहे थे किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है हाँ इतना अवश्य समझ आ रहा था कि ये लोग आन्ध्रप्रदेश को लेकर कोई मुद्दा उठा रहे है कुछ देर शोर शराबे के बाद वे लोग चले गए और 10 मिनिट कार्यवाही देखने के बाद हमें उठा दिया ताकि अन्य लोग भी संसद की कार्यवाही देख सके.

हम सभी संसद सभागार से बाहर आ गए.

कार्यवाही देखने के पश्चात कुछ छात्रों नें सांसद महोदय जी से प्रश्न किया कि सर जी जो विपक्ष से नेता जस्टिस आन्ध्रा जस्टिस आन्ध्रा कह रहे थे ये क्या प्रस्ताव लेकर आये थे ?

सांसद महोदय जी ने बताया कि यह आन्ध्रप्रदेश के विपक्षी नेता थे जो आन्ध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव लेकर आये थे अध्यक्ष महोदया इस प्रस्ताव पर विचार करेंगी

सांसद महोदय जी प्राचार्य महोदय जी और सभी छात्र छात्राओं को लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के अॉफिस में ले गये जहाँ अध्यक्ष महोदया मेमजी ने सभी छात्र छात्राओं से मुलाकात की. और सभी के साथ सामूहिक छायांकन कराया

अध्यक्ष महोदया जी को कुछ कार्य से विदेश जाना था और उनकी फ्लाइट का समय हो रहा था. वे फोटो खिंचाने के बाद चली गयी.

हम सभी संसद भवन का भ्रमण कर रहे थे तब सांसद जी के सहायककर्ता श्री सुशील सिंह जी ने संसद भवन  भ्रमण के दौरान गाइड किया और संसद भवन का इतिहास बताया.

उन्होने बताया कि भारत मे संसद भवन का निर्माण अंग्रेजो के शासनकाल में हुआ.

इसका निर्माण सन् 1912 से शुरू हो गया था और 1921 से 1927 के दौरान निर्माण हुआ इसका निर्माण विदेशी वास्तुकार एडविन लटियन्स और हर्बर्ट बेकर ने कराया था. यह भवन लाल पत्थर और भी अन्य प्रकार के पत्थरो से मिलकर बनाया है संसद भवन की बनावट म.प्र. के विदिशा में स्थित चौसठ यौगिनी मंदिर के  समान ही है विदेशी वास्तुकारों ने इसी मंदिर से प्रेरित होकर बनाया है.

यह वृताकार आकृति में है जिसका व्यास 560 फुट और घेरा 533 मीटर है यह छः एकड़ की भूमि में फैला है इस भवन में 12 दरवाजे है बरामदे में 144 खम्भों की कतार है जहाँ प्रत्येक की खम्भे की ऊचाई लगभग 27 फुट है संसद के केन्द्रीय कक्ष में जहाँ संसदीय कार्यवाही की जाती है उस सेन्ट्रल हॉल का विशाल वृताकार ढाँचा गुम्बद का व्यास 98 फुट और ऊचाई 118 फुट है संसद भवन की बनावट वास्तुकला उत्कृष्ट नमूना है  भले ही इस भवन को विदेशी वास्तुकारों ने बनाया हो लेकिन इसकी डिजाइन इसे बनाने मे उपयोगी सामान और सभी श्रमिक भारतीय थे.

संसद भवन दो भागों मे विभक्त है एक भाग में लोकसभा है और दूसरे भाग में राज्यसभा है.

संसद भवन के बाहर संसद परिसर में लंबे-चौड़े लान, जलाशय, फव्‍वारे और सड़कें बनी हुई हैं. यह सारा परिसर सजावटी लाल पत्‍थर की दीवारों तथा लोहे के जंगलों और लोहे के ही विशाल दरवाजों से घिरा हुआ है. बाहर अनेक जगह पूरे परिसर में महापुरूषों की विशालतम् मूर्तियाँ लगी हुई है जो दर्शकों को आकर्षक करती है. संसद भवन में पुस्तकालय प्रेस मीडिया विभाग और बहुत से विभाग भी है और भारत की पहली संसद भी यही लगी थी. और सुशील सिंह जी ने हमें बहुत सी बाते बताकर आश्चर्यचकित कर दिया.

सांसद महोदय जी ने सभी को संसद भवन में स्थित कैन्टीन में भोजन कराने ले गये. जहाँ पर सभी छात्र  छात्राओं ने प्राचार्य महोदय जी के साथ और सांसद महोदय जी के साथ भोजन किया. भोजन के पश्चात सांसद महोदय जी ने  लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में अंतर बताया. फिर सांसद महोदय जी हम सभी को संसद के अंदर बने म्यूजियम में ले गये वहाँ पर  अध्यक्ष महोदया जी को विदेश यात्रा के दौरान भेंट  स्वरूप जो उपहार मिले थे वे अद्भुत थे. और बेशकीमती थे म्यूजियम के एक कमरे में एक छोटी सी संसद थी जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी के समय के नेताओं की पूरी की पूरी संसद थी और सभी की पत्थर से निर्मित मूर्तियाँ थी . इन मूर्तियों के बगल में खाली कुर्सी थी जिस की बगल में बैठ कर एक सामूहिक छायांकन कराया .  सभी ने प्राचार्य महोदय जी और सांसद महोदय जी के साथ संसद भवन के बाहर अंतिम यादगार पलों को छायांकन में संजोया.

दोपहर 2.30 का समय था हमें आज ही रात गाडरवारा के लिए रात की ट्रेन से जाना था हम सभी आर्या होटल से सारा सामान लेकर सासंद जी के बंगले आ गए और सारा सामान सांसद जी के बंगले पर रखा उस समय सांसद जी बंगले पर नही थे.

प्राचार्य महोदय जी हम सभी को मेट्रो स्टेशन ले गये हम सभी छात्र छात्राओं का मेट्रो से पहला सफर था और मेट्रो की जो टिकिट थी वह एक प्लास्टिक के सिक्के के जैसी थी और उसके नीचे एक चिप लगी थी इस चिप को मेट्रो से प्रवेश करने वाले द्वार पर लगी मशीन से स्पर्श कराने पर ही गेट खुले और यह सरकार की सम्पत्ति थी हमने नोटिस पढ़कर उस टिकिट को जमा करा दिया. और मेट्रो से हम एक शापिंग मॉल पहुँचे. हम सभी ने घूमने के लिए अलग अलग ग्रुप बना लिए ताकि भीड़ ना लगे. मेरे ग्रुप मे अरूणा,नीलेश , अभिलाषा,अर्चना थी.

और दूसरे ग्रुप में गोपी के साथ अजीत जी आकाश और अरविन्द थे. तीसरे ग्रुप में अलीशा ज्योति शिवानी मनोज रोहित थे चौथे ग्रुप में महेन्द्र के साथ दीक्षा शिवा आराधना सुमित थे हम सभी शापिंग मॉल में घूमने लगे वहाँ का बाजार बड़ा और भूल भुलैया जैसा था और वहाँ के दुकानदार किसी भी वस्तु को जबरन ही बुलाकर और जबरदस्ती से बेच रहे थे. फिर भी सभी छात्र छात्राओं ने बहुत सा सामान खरीदा. शाम के 6:30 बजे थे और हमें गाडरवारा के लिए भी निकलना था हम सभी शापिंग मॉल से बाहर आ गये जहाँ पर सर मेम हम सभी का इंतजार कर रहे थे. गाडरवारा जाने का समय हो रहा था हमारा एक सहपाठी मित्र अपने ग्रुप से बिछड़ गया. जिसे हम सभी छात्रों और सुरेन्द्र सर ने यहाँ वहाँ ढूँढा. पर वह किसी को नहीं मिला. जिसे प्राचार्य महोदय आर के कौरव सरजी ने शॉपिंंग मॉल के कार्यालय से एनाउंसमेंट कराया. जो बहुत देर बाद शॉपिंग मॉल से आया. प्राचार्य महोदय जी और सभी शिक्षकगण उस पर बहुत नाराज हुए और साथ में रहने को कहाँ और उस मित्र ने अपनी गलती मानते हुए क्षमा माँगी. सभी छात्र छात्राओं के आने के बाद प्राचार्य महोदय जी के साथ अंतिम बार सांसद जी के बंगले पर जाकर अपना सामान रखा और सांसद जी से विदा ली और उन्हे हमने गाडरवारा महाविद्यालय आने का आमंत्रण दिया. तत्पश्चात हम सभी प्राचार्य महोदय जी के साथ रेल्वे स्टेशन पहुँचे. रिजर्वेशन टिकिट आने जाने का दोनो तरफ का था.

गाडी अपने समय से थोडा लेट थी कुछ समय इंतजार करने के पश्चात ट्रेन प्लेटफार्म पर आ गयी और सभी अपने सामान के साथ अपनी रिजर्व सीट पर आ बैठ गये सभी लोगो को बहुत भूख लगी थी प्राचार्य महोदय जी ने सभी का ख्याल रखते हुए सभी को पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराया. भोजन करने के पश्चात टीसी आया टिकिट की पूछने लगा हम छात्रों ने उसे प्राचार्य महोदय जी के पास पहुँचा दिया कुछ समय बाद वह लौटकर आया और सभी को सोने वाली सीट पर बैठने या सोने की अनुमति दे दी.

रात का समय था ट्रेन चलने लगी और हम सभी बर्थ पर सो गए.

सुबह 6:00 बजे भोपाल स्टेशन पहुँचे और दैनिक क्रियाओं से निवृत होकर चाय नाश्ता किया.  निर्धारित समय से दो घण्टे लेट  11 :00 बजे ट्रेन स्टेशन से चली और हम सभी गाडरवारा जाने लिए बैठ गए

 4-5 घण्टे के सफर मे हमने बहुत मस्ती की कुछ छात्राये ताश खेलने लगी और कुछ छात्र छात्राओं ने अंताक्षरी शुरू कर जी अंताक्षरी में सभी यात्रियों को इतना मजा आया कि उन्होने इतने शोर और मस्ती के लिए मना नहीं किया. प्राचार्य महोदय जी ने भी अंताक्षरी का आनन्द लिया अंताक्षरी के ग्रुप में अर्चना नीलेश अभिलाषा महेन्द्र रोहित मनोज अजीत निहाल अरूणा शिवा दीक्षा आराधना आदि छात्र छात्राऐ थी. अरूणा और अर्चना ने लय में ” तेरे नयना सावन भादों फिर भी मेरा मन प्यासा ” यह गीत सुन सभी छात्र छात्राऐ गाने लगे.सभी ने सफर में अंताक्षरी के इतने गाने गाए गए की समझ किसी को नही आया कि इसमें जीता कौन हारा कौन क्योकि दोनो ग्रुप आपस में एक गये प्राचार्य महोदय जी ने भी कुछ गाने गये.और जो आनन्द की अपार अनुभूति हुई वह कथनीय है. गाडरवारा पहुँचने के  लिए दस मिनिट थे.

सभी ने अपना सामान समेट कर गाडी के गेट के पास आ गये जहाँ प्राचार्य महोदय जी और शुक्ल सर ने सभी छात्र छात्राओं की तारीफ की और प्राचार्य मेरी रचनाओं के विषय पर कहते हुए इस लोकसभा संसद भवन नई दिल्ली भ्रमण यात्रा पर लेख लिखने के लिए कहा. मैने सर को यह लेख लिखने का आश्वासन दिया कि मैं इस यादगार तथा विस्मरणीय यात्रा को लिखूँगा.

कुछ समय बाद गाडी गाडरवारा स्टेशन पर आ गयी सभी ने अपना सामान उठाया और प्राचार्य महोदय जी से विदा ली सभी छात्र छात्राओं के अभिभावक उन्हे स्टेशन लेने आये थे अतः सभी अपने अपने घर चले गए और हम सभी का लोकसभा संसद भवन की यात्रा यादगार रही.

 निहाल छीपा

पता:- गणेश मंदिर के पास,शास्त्री वार्ड गाडरवारा जिला:- नरसिंहपुर म.प्र.

Email – nihalchhipa1997@gmail.com

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