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लघुकथा

“आतंकवादी का धर्म”

  “आतंकवादी का धर्म”

वो चारों यूं तो अलग-अलग सम्प्रदायों से थे, लेकिन उन्हें सिखाया गया था कि उनका धर्म लोगों को मारना-काटना ही है. आज भी वो चारों एक साथ इसी इरादे से निकले.

मार-काट करते हुए आगे बढ़ ही रहे थे कि एक का धर्म-स्थल आया, उसने वहां मार-काट करने के लिये मना किया तो बाकी तीन ने उसी को काट कर वहाँ मार-काट मचा दी.

फिर कुछ और आगे बढे तो दूसरे का पूजा-घर आया, उसने मना किया तो बाकी दो ने उसकी हत्या कर वहाँ मार-काट की.

थोड़ा और आगे जाने पर तीसरे का प्रार्थना-स्थल आया, उसने मना किया तो चौथे ने उसका गला काट कर अकेले ही वहाँ मार-काट कर दी.

चौथा और आगे बढ़ा तो उसका अपना धार्मिक-स्थल आया, वो वहाँ से चुपचाप सिर झुका कर आगे निकल ही रहा था कि पीछे से एक गोली चली और उसकी पीठ के रास्ते सीने में धंस गयी.

मरते-मरते उसने पीछे देखा तो उसकी आँखें आश्चर्य से फ़ैल गयी, उसे गोली मारने वाला एक नेता था, जिसे उसने हर धार्मिक-स्थल पर सबसे पहले भागते हुए देखा था.-0

 

डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

सहायक आचार्य (कंप्यूटर विज्ञान)

जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर (राजस्थान)

पता – 3 प 46, प्रभात नगर, सेक्टर – 5, हिरण मगरी, उदयपुर (राजस्थान) – 313002

ई-मेल -chandresh.chhatlani@gmail.com

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