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गणेश जी का प्रिय मन्त्र

  शास्त्रों के अनुसार हिंदु धर्म के किसी भी धार्मिक या मांगलिक कार्य का आरंभ गणपतिजी की पूजा अर्चना से ही प्रारम्भ होता है .

भगवान गणेशजी को विघ्नहर्ता कहा गया है . गणेश जी उन्नति, खुशहाली और मंगलकारी देवता हैं। जीवन में समस्त प्रकार कि रिद्धि-सिद्धि एवं सुखो कि प्राप्ति एवं अपनी सम्स्त आध्यात्मिक-भौतिक इच्छाओं कि पूर्ति हेतु गणेश जी कि पूजा-अर्चना एवं आराधना अवश्य करनी चाहिये।

हमारे शरीर में पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच कर्मेन्द्रियां और चार अंतःकरण हैं। इनके पीछे जो शक्तियां हैं उनको चैदह देवता कहते हैं। इन देवताओं के मूल प्रेरक भगवान श्री गणेश हैं। गणपतिजी के अलग-अलग नाम व अलग-अलग स्वरूप हैं,

    गणेश जी का प्रिय मन्त्र – “ ओम् गं गणपतये नमः “

प्रतिदिन भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित की जानी चाहिए। विशेषतौर दूर्वा चढ़ाकर उनका पूजन-अर्चन करने से  हमारे जीवन के समस्त कष्टों का निवारण शीघ्र ही हो जाता है .

श्रीगणेश को दूर्वा अर्पण करने का मंत्र

‘श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि।’

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साभार

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